[PDF] साहित्य दर्पण - प्रथम परिच्छेदः | Sahitya Darpana - Pratham Parichchheda | विश्वनाथ कविराज - Vishvanath Kaviraj | eBookmela

साहित्य दर्पण – प्रथम परिच्छेदः | Sahitya Darpana – Pratham Parichchheda | विश्वनाथ कविराज – Vishvanath Kaviraj

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“साहित्य दर्पण” – एक अद्भुत साहित्यिक खजिना!

विश्वनाथ कविराज द्वारा रचित “साहित्य दर्पण” एक ऐसी रचना है जो भारतीय साहित्य के इतिहास और सिद्धांत को गहराई से समझने के लिए एक अनिवार्य पाठ है। इसकी सरल भाषा और तर्कपूर्ण प्रस्तुति न केवल विद्वानों बल्कि साहित्य प्रेमियों को भी मोहित करती है। “साहित्य दर्पण” पढ़कर आप ना केवल संस्कृत साहित्य के मूल तत्वों से परिचित होंगे, बल्कि रचनात्मकता की गहराई और सुंदरता को भी अनुभव करेंगे।


“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेदः: विश्वनाथ कविराज की साहित्यिक प्रतिभा का परिचय

“साहित्य दर्पण” नामक यह ग्रंथ, संस्कृत साहित्य के महान विद्वान विश्वनाथ कविराज द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण रचना है। यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य के सिद्धांतों, शैलियों और कलात्मकता को विस्तार से बताता है, और इसकी महत्ता न केवल इसकी विद्वत्तापूर्ण प्रस्तुति, बल्कि इसकी व्यावहारिक उपयोगिता में भी निहित है।

“साहित्य दर्पण” को कुल १० परिच्छेदों में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक परिच्छेद एक विशिष्ट पहलू को समर्पित है। प्रथम परिच्छेद, जो इस ग्रंथ का आगाज है, “साहित्य का परिचय” नाम से जाना जाता है।

इस परिच्छेद में विश्वनाथ कविराज ने साहित्य की परिभाषा, उद्देश्य, प्रकार और भेद को स्पष्ट किया है। उन्होंने काव्य को मुख्य रूप से शब्द-काव्य और अर्थ-काव्य में विभाजित किया है, और दोनों ही प्रकारों के साहित्य को गहराई से विश्लेषित किया है।

प्रथम परिच्छेद में साहित्य के विभिन्न अंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है, जिनमें शब्द, अर्थ, अलंकार, ध्वनि, रीति आदि शामिल हैं।

विश्वनाथ कविराज ने “काव्य” को “अनुकरण” की कला बताया है, और इसे “सर्वार्थत्व” (सभी प्रकार के अर्थों को व्यक्त करने की क्षमता) से युक्त बताया है। इसके माध्यम से, उन्होंने साहित्य को एक ऐसी कला बताया है जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि ज्ञान भी प्रदान करती है।

प्रथम परिच्छेद के माध्यम से विश्वनाथ कविराज का साहित्य दर्शन स्पष्ट होता है, जिसका आधार “ध्वनि” और “रीति” पर आधारित है।

“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेद साहित्य की मूल बातों को समझने के लिए एक उत्कृष्ट शुरुआत है। यह साहित्य के छात्रों, विद्वानों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी रचना है।

“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेद: मुख्य विशेषताएँ

  1. स्पष्ट और सरल भाषा: “साहित्य दर्पण” की भाषा सुंदर और सरल है, जिससे इसे समझना आसान है।
  2. तर्कपूर्ण प्रस्तुति: ग्रंथ में प्रत्येक बिंदु का विस्तृत तर्क दिया गया है, जो इसकी विश्वसनीयता को बढ़ाता है।
  3. व्यावहारिक उपयोगिता: “साहित्य दर्पण” के सिद्धांतों का काव्य रचना और साहित्य की समझ में व्यावहारिक उपयोग है।
  4. साहित्य के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत वर्णन: ग्रंथ में साहित्य के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का विस्तार से वर्णन किया गया है।

“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेद: महत्व

“साहित्य दर्पण” का प्रथम परिच्छेद साहित्य के अध्ययन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। यह परिच्छेद साहित्य के मूल सिद्धांतों को समझने में सहायता करता है। यह छात्रों, विद्वानों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनिवार्य पाठ है।

“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेद: कैसे पढ़ें?

“साहित्य दर्पण” को पढ़ने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स:

  1. ध्यानपूर्वक पढ़ें: ग्रंथ को ध्यानपूर्वक पढ़ें और प्रत्येक बिंदु को समझने का प्रयास करें।
  2. टिप्स लें: महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करें और उन्हें समझने का प्रयास करें।
  3. अन्य ग्रंथों से तुलना करें: “साहित्य दर्पण” को अन्य साहित्य सिद्धांतों से तुलना करें और इसकी विशिष्टता को समझने का प्रयास करें।

“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेद: कहाँ से डाउनलोड करें?

“साहित्य दर्पण” का प्रथम परिच्छेद इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध है। आप Google पर “साहित्य दर्पण प्रथम परिच्छेद PDF” खोज कर इसकी PDF कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं।

“साहित्य दर्पण” – प्रथम परिच्छेद: निष्कर्ष

“साहित्य दर्पण” का प्रथम परिच्छेद साहित्य के अध्ययन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। यह परिच्छेद साहित्य के मूल सिद्धांतों को समझने में सहायता करता है। यह छात्रों, विद्वानों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनिवार्य पाठ है।

संदर्भ:

  1. “साहित्य दर्पण”: https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.312369
  2. “विश्वनाथ कविराज”: https://en.wikipedia.org/wiki/Visvanatha_Kaviraja
  3. “ध्वनि”: https://en.wikipedia.org/wiki/Dhvani
  4. “रीति”: https://en.wikipedia.org/wiki/R%C4%ABti

The Sahitya Darpana Or Mirror Of Composition Vol-x by Kaviraja,.viswanatha

Title: The Sahitya Darpana Or Mirror Of Composition Vol-x
Author: Kaviraja,.viswanatha
Subjects: Banasthali
Language: san
साहित्य दर्पण - प्रथम परिच्छेदः | Sahitya Darpana - Pratham Parichchheda 
 |  विश्वनाथ कविराज - Vishvanath Kaviraj
Collection: digitallibraryindia, JaiGyan
BooK PPI: 300
Added Date: 2017-01-18 06:55:37

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